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विवरण

 एसजेवीएन लिमिटेड(पूर्व नाम नाथपा झाकड़ी पावर कारपोरेशन लिमिटेड - एनजेपीसी) की स्थापना 24 मई, 1988 को हिमाचल प्रदेश में सतलुज नदी बेसिन और किसी भी अन्य स्थान पर परियोजनाओं की आयोजना कर इनके सर्वेक्षण से लेकर निर्माण तक के कार्य करने एवं इनका परिचालन व रख-रखाव करने हेतु भारत सरकार तथा हिमाचल प्रदेश सरकार के संयुक्त उपक्रम के रूप में की गई थी। सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड की वर्तमान प्राधिकृत शेयर पूंजी रु.4500 करोड़ है।

नाथपा झाकड़ी जलविद्युत स्टेशन - एनजेएचपीएस (1500 मेगावाट) सतलुज जल विद्युत निगम द्वारा निष्पादन के लिए हाथ मे ली गई प्रथम परियोजना है। एसजेवीएन ने विश्व बैंक से वित्तीय सहायता लेने के अतिरिक्त यूरोपियन बैंको के कंसोर्टियम, पावर फाइनेंस कारपोरेशन (पीएफसी) तथा विभिन्न घरेलू वाणिज्यिक बैंकों से भी ऋण लिया है।

 
इकाई सिंक्रोनाइजेशन वाणिज्यिक उत्पादन
इकाई-6 23 नवम्बर, 2003 02 जनवरी, 2004
इकाई-5 20 सितंबर, 2003 06 अक्तूबर, 2003
इकाई-4 22 जनवरी, 2003 30 मार्च, 2004
इकाई-3 13 फरवरी, 2004 31 मार्च, 2004
इकाई-2 09 मार्च, 2004 06 मई. 2004
इकाई-1 31 मार्च, 2004 18 मई, 2004

परियोजना के आस-पास के लोगों का सामाजिक एवं आर्थिक विकास करने के अतिरिक्त, परियोजना पूरी होने पर मेगावाट की नाथपा झाकड़ी जलविद्युत परियोजना 90 प्रतिशत विश्वसनीय वर्ष में 6950.88 मिलियन यूनिट विद्युत ऊर्जा का उत्पादन करने के लिए डिजाइन की गई है। यह परियोजना उत्तरी ग्रिड के राज्यों को 1500 मेगावाट महत्वपूर्ण ऊर्जा भी उपलब्ध करा रही है।

बस-बार पर उत्पादित ऊर्जा में से 12 प्रतिशत की आपूर्ति गृह राज्य हिमाचल प्रदेश को निःशुल्क की जा रही है। शेष उत्पादित 88 प्रतिशत ऊर्जा मे से 25 प्रतिशत की आपूर्ति हिमाचल प्रदेश को बस-बार दरों पर की जा रही है। विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा शेष बिजली का आबंटन उत्तरी क्षेत्र के विभिन्न राज्यों/संघशासित प्रदेशों को किया गया।

उक्त के अतिरिक्त, संबंधित क्षेत्र को कृषि एवं औद्योगिक उत्पादन में बढ़ोत्तरी के रूप में अप्रत्यक्ष लाभ भी प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा, इस परियोजना से बड़ी संख्या में कुशल एवं अर्धकुशल कामगारों को फायदेमंद रोजगार हासिल हुआ है। अगम्म एवं दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को भी स्कूल, अस्पताल आदि जैसी आवश्यक सुविधाएं मुहैया करवाई गई हैं। इस प्रकार नाथपा झाकड़ी जलविद्युत परियोजना, परियोजना के आसपास के निवासियों के लिए या कहें समग्र समाज के सामाजिक एवं आर्थिक उन्नयन की अग्रदूत बन गई है।

 एसजेवीएन की भविष्य की परियोजनाएँ एवं योजनाएँ
 
एसजेवीएन वर्तमान में 1500 मेगावाट क्षमता के नाथपा झाकड़ी जलविद्युत स्टेशन का प्रचालन एवं 412 मेगावाट क्षमता की रामपुर जल विद्युत परियोजना का निर्माण कर रहा है। 775 मेगावाट क्षमता की लूहरी जल विद्युत परियोजना तथा 40 मेगावाट क्षमता की धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजना के निष्पादन अनुबंधों पर हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ 27 अक्तूबर,2008 को हस्ताक्षर किए गए हैं । इसके अतिरिक्त एसजेवीएन उत्तराखण्ड राज्य में 252 मेगावाट की देवसरी जल विद्युत परियोजना, 59 मेगावाट की नैटवार मोरी तथा 45 मेगावाट की जाखोल सांकरी जल विद्युत परियोजनाओं का भी निर्माण कर रहा है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने एसजेवीएन को हिमाचल प्रदेश में खाब जल विद्युत परियोजना (1020 मेगावाट) डीपीआर बनाने के लिए भी सौंपी है और उम्मीद है कि एसजेवीएन ही इसका निर्माण करेगा।

कंपनी ने अब देश की सीमाएं लांघकर खुली बोली के आधार पर नेपाल में अरुण-III जलविद्युत परियोजना (402 मेगावाट) हासिल की है। इसके अतिरिक्त कंपनी को भूटान में वांग्चू जल विद्युत परियोजना (600 मेगावाट) तथा खोलोंग्चू जल विद्युत परियोजना (650 मेगावाट) नामक दो परियोजनाओं की डीपीआर बनाने/उन्नयन करने का कार्य भी सौंपा गया है। कुल मिलाकर देखा जाए तो अगले कुछ सालों में एसजेवीएन के अरबों डालर लागत वाली परियोजनाओं के प्रचालन एवं निर्माण क साथ संबंद्ध होने की संभावना है।

   

सर्वाधिकार सुरक्षित एसजेवीएन लिमिटेड